बलौदाबाजार। संडे स्पेशल—समीक्षा परिक्रमा के तहत सामने आने वाली यह रिपोर्ट गोपनीय सूत्रों, प्राप्त जानकारियों और नगर में चल रही चर्चाओं के आधार पर तैयार की जाती है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि लोकहित से जुड़े सवालों को जनता और शासन-प्रशासन तक पहुंचाना है।
जिले में जुआ, सट्टा, गांजा, अवैध शराब और चोरी जैसे मामलों में पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। धरपकड़ और प्रकरण दर्ज किए जाने से पुलिस की सक्रियता नजर आती है। इसके बावजूद अपराध की दुनिया से जुड़े कुछ चर्चित नामों और पुराने नेटवर्क को लेकर सवाल अब भी बने हुए हैं।
तीन साल से अधिक की पदस्थापना पर भी उठ रहे सवाल
चर्चाओं के अनुसार जिले के कुछ थानों में लंबे समय से पदस्थ पुलिसकर्मियों को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थापना के कारण स्थानीय स्तर पर अपराध से जुड़े लोगों और गतिविधियों की जानकारी किस हद तक प्रभावित होती है, यह पुलिस प्रशासन के लिए समीक्षा का विषय हो सकता है।
नगर में यह चर्चा भी सुनाई देती है कि बड़े सट्टा कारोबार, अवैध शराब और नशीले पदार्थों से जुड़े कथित नेटवर्क के बड़े नामों तक कार्रवाई की पहुंच कितनी प्रभावी है। यदि छोटे स्तर पर लगातार कार्रवाई हो रही है, तो बड़े नेटवर्क तक कार्रवाई की कड़ी क्यों नहीं पहुंच रही—यह सवाल चर्चा के केंद्र में है।
पुलिसकर्मियों को लेकर भी चर्चाएं
कुछ पुलिसकर्मियों को लेकर कथित अवैध वसूली, अनुचित व्यवहार तथा अन्य आरोपों की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। ऐसे मामलों में संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष और विभागीय जांच ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकती है।
अब्दुल हैदर प्रकरण भी चर्चा में
अब्दुल हैदर से जुड़े मामलों को लेकर भी नगर में चर्चाओं का दौर जारी है। उसके संबंध में पुलिस की कार्रवाई, उसकी गिरफ्तारी की स्थिति तथा कथित लेन-देन से जुड़े विभिन्न नामों को लेकर तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं।
ऐसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस की कार्रवाई की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, तो उसकी तलाश, गिरफ्तारी और उससे जुड़े आर्थिक लेन-देन की जांच किस स्थिति में है? इस संबंध में आधिकारिक स्थिति सामने आने से कई चर्चाओं पर विराम लग सकता है। वहीं नगर के प्रबुद्ध जनों के बीच यह भी चर्चा जोरो पर कि पुलिस यदि एक वरना कार के चोरो को हवाई जहाज से पंजाब जा कर पकड़ कर ला सकती है तो अब्दुल हैदर को क्यों नहीं पकड़ सकती?
चोरी के मामले में बरामदगी को लेकर सवाल
सिटी कोतवाली की हालिया कार्रवाई भी नगर में चर्चा का विषय बनी हुई है। मामले में पुलिस द्वारा कार्रवाई किए जाने के बावजूद कथित रूप से चोरी के सभी सामान अथवा आभूषणों की बरामदगी की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
साथ ही संबंधित प्रकरण में पूछताछ, बरामदगी और आगे की विवेचना किस दिशा में चल रही है, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने आने की जरूरत महसूस की जा रही है। यदि बरामदगी पूरी हो चुकी है तो पुलिस द्वारा उसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक करना चर्चा पर विराम लगा सकता है। चूंकि पुलिस की लगभग डेढ़ दिन तक चली पूछताछ के बावजूद समान का बरामद ना होना और चांदी गलाने वाले अथवा लेने, रखने वाले पर पुलिस की कार्यवाही स्पष्ट ना होने से भी मामला संदिग्ध प्रतीत हो रहा है l
गुंडा-बदमाश सूची और पत्रकारिता का सवाल
सबसे महत्वपूर्ण चर्चाओं में एक सवाल ऐसे व्यक्ति को लेकर भी है, जिसका नाम पुलिस की गुंडा-बदमाश/निगरानी सूची में दर्ज होने की बात कही जा रही है। संबंधित व्यक्ति के पत्रकारिता गतिविधियों में सक्रिय होने तथा विभिन्न सरकारी कार्यालयों में आवाजाही को लेकर भी चर्चाएं हैं।
यदि किसी व्यक्ति का नाम वास्तव में पुलिस की निगरानी सूची में दर्ज है, तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है? क्या रिकॉर्ड अभी भी प्रभावी है? क्या सूची समय-समय पर अपडेट की जाती है? और यदि संबंधित व्यक्ति पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय है तो पुलिस के साथ उसके आधिकारिक संवाद की स्थिति क्या है?
बताया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति पुलिस के सोशल मीडिया/संवाद समूहों में भी दिखाई देता है तथा पुलिस अधिकारियों के आसपास उसकी मौजूदगी को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। इन सभी बिंदुओं पर पुलिस प्रशासन की स्पष्ट स्थिति सामने आना जरूरी है, ताकि अफवाह और वास्तविकता के बीच अंतर स्पष्ट हो सके।
पुलिस अधीक्षक कार्यालय के आसपास गतिविधियां भी चर्चा में
नगर में यह चर्चा भी है कि निगरानी सूची में नाम बताए जा रहे व्यक्ति द्वारा पुलिस अधीक्षक कार्यालय के आसपास सोशल मीडिया रील बनाए जाने और उन्हें सार्वजनिक किए जाने के बावजूद कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई।
यहां सवाल किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाने का नहीं, बल्कि पुलिस रिकॉर्ड और वर्तमान कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने का है। यदि रिकॉर्ड में कोई व्यक्ति निगरानी सूची में है तो उसकी वर्तमान स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट क्यों नहीं की जाती—यह सवाल भी पुलिस प्रशासन से जवाब मांगता है।
राज्योत्सव और धान खरीदी की तैयारियां भी तेज
इधर प्रशासनिक स्तर पर राज्योत्सव, धान खरीदी और राजस्व मामलों को लेकर भी तैयारियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। किसानों से जुड़े मामलों तथा लंबित राजस्व प्रकरणों के निराकरण को लेकर लोगों की उम्मीद प्रशासन से बनी हुई है।
राज्योत्सव की तैयारियों के साथ-साथ धान खरीदी व्यवस्था को सुचारु रखने, किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और लंबित राजस्व मामलों का समयबद्ध निराकरण हो—ये प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं।
संडे समीक्षा का बड़ा सवाल
कुल मिलाकर बलौदाबाजार जिले में पुलिस और प्रशासनिक गतिविधियां लगातार जारी हैं। कार्रवाई भी हो रही है और अपराध नियंत्रण को लेकर प्रयास भी दिखाई दे रहे हैं। लेकिन अब असली सवाल कार्रवाई की संख्या नहीं, बल्कि कार्रवाई की पहुंच का है।