बलौदाबाजार। शराब दुकान में सेल्समैन की नौकरी लगाने का झांसा देकर महासमुंद जिले के एक ग्रामीण से 50 हजार रुपये लेने और बाद में फर्जी डीडी व बैंक रसीद भेजने का मामला सामने आया है। पीड़ित कलश राम ध्रुव, निवासी ग्राम खेमड़ा, थाना कोमाखान, जिला महासमुंद ने सिटी कोतवाली बलौदाबाजार में शिकायत दर्ज कराई है। मामले में पुलिस ने अपराध क्रमांक 745/2026 के तहत बीएनएस की धारा 318(5) में अपराध पंजीबद्ध किया है।
शिकायत के अनुसार, कलश राम ध्रुव की बागबाहरा में काम करने के दौरान अश्वनी यादव से पहचान हुई थी। अप्रैल 2026 में नौकरी की तलाश के दौरान अश्वनी यादव ने उसे प्रणव अवस्थी का मोबाइल नंबर दिया। आरोप है कि प्रणव अवस्थी ने शराब भट्ठी में सेल्समैन की नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाते हुए 1.50 लाख रुपये की मांग की।
पीड़ित का कहना है कि इतनी बड़ी रकम एक साथ देने में असमर्थता जताने पर 50-50 हजार रुपये में राशि देने की बात कही गई। इसके बाद प्रणव अवस्थी ने उसे बलौदाबाजार बस स्टैंड बुलाया और कथित तौर पर नौकरी लगाने का भरोसा दिलाकर नगद 50 हजार रुपये ले लिए।
नौकरी नहीं लगी तो मांगी रकम, भेजे फर्जी दस्तावेज
शिकायतकर्ता के मुताबिक एक माह बाद जब नौकरी नहीं लगी तो उसने अपनी रकम वापस मांगी। आरोप है कि आरोपी लगातार एक-दो दिन में पैसा लौटाने की बात कहकर टालता रहा। बाद में 25 अप्रैल 2026 और 1 अगस्त 2026 को व्हाट्सऐप के माध्यम से 60 हजार रुपये की डीडी तथा 50 हजार रुपये खाते में भेजे जाने संबंधी बैंक रसीद भेजी गई।
पीड़ित का दावा है कि बैंक में जांच कराने पर दोनों दस्तावेज फर्जी पाए गए। इसके बाद उसने सिटी कोतवाली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पहले से जेल में है प्रणव अवस्थी
बताया जा रहा है कि प्रणव अवस्थी पहले से ही फर्जी ट्रांसफर आदेश तैयार करने के मामले में जेल में है। अब उसके खिलाफ नौकरी लगाने के नाम पर 50 हजार रुपये लेने और कथित फर्जी डीडी एवं बैंक रसीद भेजने के मामले में एक और अपराध दर्ज होने से मामला और गंभीर हो गया है।
आबकारी विभाग की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
मामले में अब आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। आखिर शराब दुकान में सेल्समैन की नौकरी लगाने के नाम पर इतनी बड़ी रकम मांगने का भरोसा आरोपी को कहां से मिला और क्या इस पूरे मामले में शराब दुकानों में भर्ती प्रक्रिया अथवा संबंधित लोगों की भूमिका की भी जांच होगी?
वहीं, इन दिनों कुछ भाजपा नेताओं की आबकारी अधिकारियों के आसपास कथित आवाजाही और जमावड़े को लेकर भी चर्चाएं हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या नौकरी लगाने के नाम पर चल रहे इस तरह के दावों की कभी विभागीय स्तर पर जानकारी ली गई? हालांकि इस संबंध में किसी भाजपा नेता की संलिप्तता का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है और यह पहलू भी जांच का विषय है।
फिलहाल पुलिस द्वारा दर्ज अपराध और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविकता सामने आएगी। पीड़ित ने अपनी राशि वापस दिलाने के साथ आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।