पूर्वजों की स्मृति में सेवा कार्य कर दिया मानवता और संस्कारों का संदेश
बलौदाबाजार। पितृ अमावस्या भारतीय संस्कृति में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान प्रकट करने का पावन अवसर है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए अश्विन अमावस्या एवं पितृपक्ष की अमावस्या के अवसर पर दीक्षित परिवार द्वारा बलौदाबाजार जिला चिकित्सालय में सेवा कार्य किया गया।
परिवार के सदस्यों ने जिला चिकित्सालय में उपचाररत गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों तथा उनके परिजनों को फल वितरित किए। इस दौरान परिवार ने यह संदेश दिया कि पूर्वजों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि केवल स्मरण तक सीमित नहीं, बल्कि उनके दिए संस्कारों को आगे बढ़ाते हुए जरूरतमंदों की सेवा और मानवता के प्रति संवेदनशीलता में भी निहित है।
इस सेवा कार्य के दौरान स्वर्गीय जगत नारायण दीक्षित की धर्मपत्नी एवं परिवार की वरिष्ठ सदस्य श्रीमती सूर्य देवी दीक्षित (99 वर्ष) के प्रति सम्मान और पारिवारिक संस्कारों की भावना भी विशेष रूप से देखने को मिली। परिवार ने उनके संस्कारों और पूर्वजों की स्मृति को सेवा के माध्यम से आगे बढ़ाने का प्रयास किया।
जिला चिकित्सालय में फल वितरण के दौरान मरीजों एवं उनके परिजनों से आत्मीयता के साथ मुलाकात की गई। बीमारी और कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे लोगों के बीच पहुंचकर परिवार ने सहयोग एवं अपनत्व की भावना व्यक्त की।
इस अवसर पर जिला चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. अशोक वर्मा से भी दीक्षित परिवार के सदस्यों ने भेंट-मुलाकात की और सेवा कार्य को लेकर चर्चा की।
कार्यक्रम में श्रीमती सीमा दीक्षित, वात्सल्य दीक्षित, मधुकान्त दीक्षित सहित परिवार के सभी सदस्य उपस्थित रहे। इसके अलावा जीत कुमार यदु, उमेंद्र यादव, प्रिया यादव, जीवराखन यदु, राम साहू, सोमेश विश्वकर्मा एवं रानू पांडे भी सेवा कार्य में शामिल रहे।
पितृ अमावस्या के अवसर पर आयोजित यह सेवा कार्य पूर्वजों की स्मृति, पारिवारिक संस्कार और मानव सेवा के सुंदर समन्वय का उदाहरण बना। दीक्षित परिवार की इस पहल ने यह संदेश दिया कि जरूरतमंदों की सेवा और उनके दुख में सहभागी बनना ही संस्कारों को जीवंत रखने का एक सार्थक माध्यम है।