न्यूको सीमेंट प्लांट रिसदा-सोनाडीह और अनिमेष स्टील एवं पावर प्लांट ढाबाडीह को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
बलौदाबाजार। नगर के समीप रिसदा-सोनाडीह स्थित न्यूको सीमेंट प्लांट तथा ढाबाडीह स्थित अनिमेष स्टील एवं पावर प्लांट की औद्योगिक गतिविधियों को लेकर आसपास के ग्रामीणों ने वायु एवं पर्यावरण प्रदूषण संबंधी शिकायतें उठाई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि संयंत्रों से निकलने वाले धुएं, धूल एवं अन्य औद्योगिक उत्सर्जन के कारण आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में खांसी, सांस संबंधी परेशानी, एलर्जी एवं त्वचा संबंधी समस्याओं के मरीजों की संख्या बढ़ने की बात सामने आ रही है। उनका कहना है कि इसका प्रभाव विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों तथा संयंत्रों के आसपास काम करने वाले लोगों पर दिखाई देता है। हालांकि, इन स्वास्थ्य समस्याओं का सीधा कारण औद्योगिक प्रदूषण है या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए विशेषज्ञ स्वास्थ्य एवं पर्यावरण जांच आवश्यक है।
ग्रामीणों का आरोप है कि न्यूको सीमेंट प्लांट के मुख्य प्रवेश क्षेत्र के अलावा बीआरयू एवं क्लिंकर लोडिंग क्षेत्र के आसपास भी धूल की समस्या बनी रहती है। उनका कहना है कि सुबह और शाम के समय संयंत्र क्षेत्र से निकलने वाले धुएं के कारण आसपास के वातावरण में प्रदूषण की स्थिति महसूस होती है।
इसी तरह ढाबाडीह स्थित अनिमेष स्टील एवं पावर प्लांट से संबंधित गतिविधियों को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि अनुपयोगी राखड़ को सोनबरसा जंगल से लगे खदान क्षेत्र में डाले जाने की गतिविधि चल रही है। उनका कहना है कि राखड़युक्त पानी के कारण आसपास की जमीन, जलस्रोत और वन क्षेत्र प्रभावित होने की आशंका है। इस संबंध में पर्यावरणीय अनुमति एवं निर्धारित मानकों के पालन की जांच की मांग की गई है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाली धूल एवं कण आसपास के मकानों की छतों और दीवारों पर जमा होते हैं तथा खुले में सुखाए गए कपड़ों पर भी काले कण दिखाई देते हैं। ग्रामीणों के अनुसार इसका प्रभाव संयंत्रों के आसपास के कई गांवों तक महसूस किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं संबंधित पर्यावरण विभाग से दोनों औद्योगिक इकाइयों की वायु गुणवत्ता, धूल एवं धुएं के उत्सर्जन, राखड़ निस्तारण, जल गुणवत्ता तथा पर्यावरणीय मानकों के पालन की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग से प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित कर वास्तविक स्थिति का आकलन करने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में प्रदूषण संबंधी नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, संबंधित संयंत्र प्रबंधन एवं विभागीय अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।