बलौदाबाजार। उच्चतम न्यायालय के तत्वावधान में संचालित सामुदायिक मध्यस्थता पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य के जिला बलौदाबाजार का चयन किया गया है। इस परियोजना के तहत जिले के चयनित 5 ग्रामों को सामुदायिक मध्यस्थता के माध्यम से विवादमुक्त ग्राम बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान में आज ग्राम मटिया में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बलौदाबाजार द्वारा महाअभियान के अंतर्गत विशेष जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बलौदाबाजार के अध्यक्ष प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती विनीत वार्नर एवं सचिव श्री आलोक पांडेय के मार्गदर्शन में आयोजित इस अभियान का उद्देश्य यह था की न्याय केवल न्यायालयों तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक सरल, सुलभ और सहज रूप में पहुंचे तथा छोटे-मोटे विवादों का समाधान आपसी बातचीत, समझदारी और सहमति से हो सके—इसी उद्देश्य को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बलौदाबाजार के पैरा लीगल वालेंटियर्स द्वारा सामुदायिक मध्यस्थता पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत ग्राम मटिया, थाना गिधौरी में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया। इस अवसर पर ग्राम में जागरूकता रैली निकालकर ग्रामीणों को सामुदायिक मध्यस्थता के महत्व, उपयोगिता एवं लाभों के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही घर-घर पहुंचकर लोगों को इस पहल से जुड़ने और इसका लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया गया। अभियान के दौरान ग्रामीणों को बताया गया कि कई बार छोटी-छोटी गलतफहमियां, पारिवारिक मतभेद, पड़ोसियों के बीच विवाद, भूमि की सीमाओं से जुड़े कुछ मामले तथा लेन-देन संबंधी असहमतियां समय के साथ गंभीर रूप ले लेती हैं। ऐसे में आपसी संवाद, धैर्य और समझदारी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। सामुदायिक मध्यस्थता विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का एक प्रभावी माध्यम है, जिसमें निष्पक्ष मध्यस्थ संबंधित पक्षों के बीच संवाद स्थापित करने में सहायता करता है, ताकि वे स्वेच्छा से स्वीकार्य समाधान तक पहुंच सकें। ग्रामीणों को यह भी समझाया गया कि मध्यस्थता का उद्देश्य किसी एक पक्ष की जीत या दूसरे की हार सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि ऐसा समाधान तलाशना है, जिसमें दोनों पक्षों के हितों और आपसी सम्मान का ध्यान रखा जा सके। इससे न केवल अनावश्यक कटुता कम करने में मदद मिल सकती है, बल्कि परिवार, पड़ोस और समुदाय के बीच संबंधों को भी बेहतर बनाए रखने का अवसर मिलता है। अभियान में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि सामुदायिक मध्यस्थता से उपयुक्त विवादों का समाधान कम खर्चीले, सरल और सौहार्दपूर्ण तरीके से तलाशने में सहायता मिल सकती है। इससे समय की बचत हो सकती है तथा विवादों के कारण उत्पन्न मानसिक तनाव और सामाजिक दूरी को कम करने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, मध्यस्थता प्रत्येक प्रकार के विवाद के लिए उपयुक्त नहीं होती; गंभीर आपराधिक मामलों तथा कानूनन मध्यस्थता से बाहर रखे गए मामलों में संबंधित कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बलौदाबाजार की इस पहल का व्यापक उद्देश्य ग्रामीण समुदाय में कानूनी जागरूकता बढ़ाना, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की संस्कृति विकसित करना और आम नागरिकों को न्याय तक पहुंचने के सरल माध्यमों से परिचित कराना है। ऐसे अभियान तभी सफल होंगे, जब ग्रामीणजन स्वयं जागरूक बनें, दूसरों को भी जागरूक करें और छोटे-मोटे विवादों के समाधान के लिए संवाद एवं सहयोग की भावना को प्राथमिकता दें। ग्रामीणों से अपील की गई कि वे सामुदायिक मध्यस्थता के संदेश को अपने परिवार, पड़ोस और सामाजिक समूहों तक पहुंचाएं तथा विवाद की स्थिति में उचित कानूनी सलाह लेकर उपलब्ध वैकल्पिक विवाद समाधान के माध्यमों के बारे में जानकारी प्राप्त करें। सामुदायिक मध्यस्थता केवल विवाद निपटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, सामाजिक एकता और भाईचारे को मजबूत करने की एक सकारात्मक पहल है। जब गांव का प्रत्येक नागरिक विवाद बढ़ाने के बजाय समाधान खोजने की सोच अपनाएगा, तब गांव में शांति, सद्भाव और सहयोग का वातावरण और अधिक सुदृढ़ होगा।