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बलौदाबाजार

DMF-CSR फंड पर उठे सवाल, पेचवर्क को तरस रहा रिसदा-सुहेला-हथबंध मार्ग

03 Sep 2026

उद्योगों की मनमानी का खामियाजा भुगत रहे ग्रामीण

DMF-CSR फंड पर उठे सवाल, पेचवर्क को तरस रहा रिसदा-सुहेला-हथबंध मार्ग

बलौदाबाजार। औद्योगिक क्षेत्र में विकास और सामाजिक दायित्वों के बड़े-बड़े दावों के बीच रिसदा-सुहेला-हथबंध मार्ग की बदहाल स्थिति ने उद्योग प्रबंधन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में संचालित उद्योगों से भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण सड़क जर्जर हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद मरम्मत और रखरखाव की दिशा में गंभीर पहल नहीं की जा रही है।

सड़क की स्थिति इतनी खराब है कि जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं। राहगीरों, किसानों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग लगातार जोखिम भरा होता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि भारी औद्योगिक वाहनों के आवागमन का असर सड़क पर साफ दिखाई दे रहा है, लेकिन जिम्मेदारों द्वारा मामूली पेचवर्क तक नहीं कराया जा रहा है।

DMF-CSR के उपयोग पर भी उठ रहे सवाल

औद्योगिक क्षेत्रों और प्रभावित गांवों के विकास को लेकर जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) तथा CSR मद से विकास कार्य किए जाने की बात कही जाती है। इसके बावजूद ग्रामीणों को सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। ऐसे में ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्षेत्र के विकास के लिए उपलब्ध कराए जा रहे DMF और CSR फंड का वास्तविक लाभ आखिर किसे मिल रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि उद्योगों को क्षेत्र से आर्थिक लाभ तो मिल रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों को धूल, धुएं, भारी वाहनों और खराब सड़कों की समस्या झेलनी पड़ रही है। उनका कहना है कि यदि उद्योगों द्वारा सड़क के उपयोग से उसकी हालत खराब हो रही है तो उसके रखरखाव की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

हादसे की आशंका, प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

रिसदा-सुहेला-हथबंध मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान, विद्यार्थी और अन्य राहगीर आवागमन करते हैं। सड़क पर बने गड्ढों के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मार्ग की तत्काल जांच कराकर आवश्यक मरम्मत एवं पेचवर्क कराया जाए। साथ ही DMF और CSR मद से क्षेत्र में स्वीकृत एवं किए गए कार्यों की जानकारी सार्वजनिक कर फंड के उपयोग की समीक्षा और जिम्मेदारी तय की जाए, ताकि औद्योगिक क्षेत्र के आसपास रहने वाले ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन और बुनियादी सुविधाएं मिल सकें।