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बलौदाबाजार

अब्दुल हैदर अब तक पुलिस गिरफ्त से बाहर, करोड़ों के लेनदेन की जांच पर उठे सवाल

02 Nov 2026

अब्दुल हैदर अब तक पुलिस गिरफ्त से बाहर, करोड़ों के लेनदेन की जांच पर उठे सवाल

जमीन के नाम पर कथित ठगी के मामले में शासकीय-गैर शासकीय सहयोगियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की चर्चा


बलौदाबाजार। जमीन दिलाने और जमीन के सौदे में मुनाफे का भरोसा देकर लोगों से करोड़ों रुपये की कथित ठगी के मामले में आरोपी अब्दुल हैदर अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। सिटी कोतवाली में उसके खिलाफ पांच शिकायतें सामने आ चुकी हैं। हाल ही में प्राप्त दो नई शिकायतों में कुल 25 लाख रुपये लेने और जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराने के आरोप लगाए गए हैं।

मामले में अब केवल शिकायतकर्ताओं की रकम और जमीन के दस्तावेजों की जांच ही नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहे कथित जमीन कारोबार, अवैध प्लाटिंग और उससे जुड़े लेनदेन की व्यापक जांच की जरूरत को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।


10-15 वर्षों से अवैध प्लाटिंग की चर्चा, आखिर किसकी सहमति से चलता रहा कारोबार?
नगर में चर्चा है कि अब्दुल हैदर पिछले करीब 10-15 वर्षों से कथित रूप से अवैध प्लाटिंग कर लोगों को जमीन बेचने का काम करता रहा। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि लंबे समय तक इस तरह की प्लाटिंग और जमीन की खरीद-बिक्री होती रही, तो संबंधित विभागों के अधिकारियों, पटवारियों तथा अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका क्या रही?
क्या इस दौरान जमीनों के दस्तावेजों, खसरा-पंचशाला, नामांतरण, सीमांकन अथवा अन्य प्रक्रियाओं में किसी स्तर पर सहयोग मिला? यदि मिला तो किसकी भूमिका थी? इन सवालों का जवाब दस्तावेजी जांच और बैंक लेनदेन की पड़ताल से ही सामने आ सकता है।

किन खातों में पहुंची रकम, जांच का अहम बिंदु
मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि अब्दुल हैदर से जुड़े जमीन सौदों में वर्षों के दौरान करोड़ों रुपये का लेनदेन किन-किन बैंक खातों के माध्यम से हुआ। नगर में कुछ लोगों के बीच ऐसी चर्चाएं भी हैं कि कथित जमीन कारोबार से जुड़े लोगों के अलावा कुछ शासकीय अथवा गैर शासकीय लोगों के पारिवारिक सदस्यों के निजी खातों में भी रकम के लेनदेन हुए हो सकते हैं।
हालांकि, इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि ऐसे लेनदेन हुए हैं तो बैंक स्टेटमेंट, आरटीजीएस, यूपीआई अथवा अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच से यह स्पष्ट किया जा सकता है कि रकम किन लोगों तक पहुंची और उनका जमीन सौदों से क्या संबंध था।

शासकीय और गैर शासकीय सहयोगियों की भूमिका पर भी सवाल
मामले की जांच केवल अब्दुल हैदर तक सीमित रहने के बजाय कथित जमीन कारोबार से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका तक पहुंचती है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण होगा। यदि जांच में किसी पटवारी, शासकीय अधिकारी अथवा गैर शासकीय व्यक्ति द्वारा दस्तावेजी, वित्तीय या अन्य किसी प्रकार का सहयोग किए जाने के तथ्य सामने आते हैं, तो उनकी भूमिका भी जांच का हिस्सा बन सकती है।
नगर में यह चर्चा भी है कि यदि कथित रूप से इतने लंबे समय तक जमीन का कारोबार चलता रहा और बड़ी रकम का लेनदेन हुआ, तो इसमें अकेले एक व्यक्ति की भूमिका थी या अन्य लोग भी किसी स्तर पर जुड़े थे—इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

दो शिकायतों में 25 लाख रुपये का आरोप
पहली शिकायत वार्ड क्रमांक 17 रजानगर निवासी एवं वार्ड पार्षद शेख सलमान की ओर से की गई है। शिकायत के अनुसार वर्ष 2024 में अब्दुल हैदर ने मौजा परसाभदेर स्थित खसरा नंबर 175 की जमीन बेचने का प्रस्ताव दिया। शिकायतकर्ता के अनुसार जमीन खरीदने के लिए आरटीजीएस के माध्यम से आरोपी के एचडीएफसी बैंक खाते में 10 लाख रुपये जमा किए गए, लेकिन बाद में रजिस्ट्री नहीं कराई गई और संबंधित जमीन किसी अन्य व्यक्ति को बेचे जाने की जानकारी मिली।
दूसरी शिकायत लोहिया नगर निवासी सोहेल खान की है। शिकायत के मुताबिक परसाभदेर स्थित खसरा नंबर 175 की जमीन के सौदे के लिए आरटीजीएस के माध्यम से 15 लाख रुपये दिए गए। आरोप है कि रकम लेने के बाद रजिस्ट्री के नाम पर टालमटोल की गई और बाद में जमीन किसी अन्य व्यक्ति को बेचे जाने की जानकारी सामने आई।
दोनों शिकायतों में कुल 25 लाख रुपये की राशि का आरोप है।

पहले भी सामने आ चुके हैं कई पीड़ित
सिटी कोतवाली में इससे पहले भी अब्दुल हैदर के खिलाफ जमीन के नाम पर रकम लेने और रजिस्ट्री नहीं कराने से संबंधित शिकायतें सामने आ चुकी हैं। कपड़ा व्यापारियों, ऑटो पार्ट्स व्यवसायी सहित अन्य लोगों से रकम लेने के आरोपों की जानकारी भी सामने आई है।
पुलिस के अनुसार अब तक कुल पांच शिकायतें प्राप्त हुई हैं और सभी शिकायतों में सामने आए तथ्यों, दस्तावेजों तथा लेनदेन की जांच की जा रही है।

गिरफ्तारी से ज्यादा अब लेनदेन की जांच पर नजर
फिलहाल अब्दुल हैदर की गिरफ्तारी नहीं होने के कारण पुलिस की कार्रवाई की गति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खासकर यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस ने अब तक कथित जमीन सौदों से जुड़े बैंक खातों और करोड़ों रुपये के संभावित लेनदेन की कितनी पड़ताल की है।
यदि वर्षों के लेनदेन की बैंकिंग जांच की जाती है तो यह स्पष्ट हो सकता है कि रकम कहां से आई, किन खातों में गई और जमीन के सौदों से जुड़े लोगों के बीच किस प्रकार का वित्तीय संबंध था।
नगर में इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोग शासकीय एवं गैर शासकीय स्तर पर संभावित सहयोगियों की भूमिका की जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि पुलिस के सामने चुनौती यह है कि अफवाहों से अलग दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक तथ्यों को सामने लाया जाए।

पुलिस कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल
फिलहाल अब्दुल हैदर प्रकरण में पुलिस कार्रवाई की धीमी रफ्तार चर्चा का विषय बनी हुई है। विशेषकर आरोपी की गिरफ्तारी और कथित करोड़ों रुपये के लेनदेन की जांच को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
क्या पुलिस केवल शिकायतों की जांच तक सीमित रहेगी या वर्षों से चले आ रहे कथित जमीन कारोबार की पूरी वित्तीय कड़ी को खंगालेगी—यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।