बलौदाबाजार। नगर एवं आसपास के अंचल में सट्टे के कारोबार को लेकर चर्चाएं लगातार तेज हैं। सूत्रों के मुताबिक क्षेत्र में रोजाना लाखों रुपये के दांव लगाए जाने की बातें सामने आ रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि पुलिस तक भी इस गतिविधि की सूचनाएं पहुंच रही हैं, तो बड़े सट्टा खाईवालों तक कार्रवाई क्यों नहीं पहुंच पा रही है?
स्थानीय लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि पुलिस द्वारा समय-समय पर एक-दो छोटे स्तर पर सट्टा लिखने वालों को पकड़कर कार्रवाई की जाती है, लेकिन कथित तौर पर बड़े स्तर पर नेटवर्क संचालित करने वालों तक कार्रवाई नहीं पहुंच रही। इससे पुलिस की कार्रवाई की दिशा और प्रभावशीलता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्षेत्र के प्रबुद्धजनों का कहना है कि यदि सट्टे का कारोबार वास्तव में बड़े पैमाने पर संचालित हो रहा है, तो केवल छोटे सटोरियों पर कार्रवाई से इस समस्या पर प्रभावी अंकुश लगना मुश्किल है। जरूरत इस बात की है कि पुलिस पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाकर सट्टे के मुख्य संचालकों और आर्थिक लेन-देन की कड़ियों तक पहुंचे।
स्थानीय स्तर पर उठ रही चर्चाओं के बीच अब मांग उठ रही है कि पुलिस निष्पक्ष और गंभीर जांच कर यह पता लगाए कि क्षेत्र में सट्टे का नेटवर्क कौन संचालित कर रहा है, पैसों का लेन-देन किस माध्यम से होता है और क्या इसके पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क सक्रिय है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सिटी कोतवाली पुलिस छोटे सटोरियों तक सीमित कार्रवाई करेगी, या जांच का दायरा बढ़ाकर कथित बड़े खाईवालों तक भी पहुंचेगी?