बलौदाबाजार। शासन द्वारा सुशासन और आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए लगातार जनदर्शन, शिविर और जनचौपाल जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके बावजूद ग्राम तुरमा निवासी किसान छक्कनदास मनहरे अपनी समस्या के निराकरण के लिए लंबे समय से विभिन्न सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। किसान का दावा है कि वह अपनी समस्या को लेकर अब तक सैकड़ों आवेदन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को दे चुका है, लेकिन समाधान अब भी दूर है।
किसान छक्कनदास मनहरे ने पुलिस अधीक्षक से लेकर भाटापारा एसडीओपी तक आवेदन देकर सीलिंग जमीन के रिकॉर्ड गायब होने के मामले में जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं, कलेक्टर के जनदर्शन में भी उन्होंने अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा पूर्व में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं करने तथा संबंधित राजस्व अमले के विरुद्ध कार्रवाई की मांग उठाई है।
किसान के अनुसार उसकी शिकायतें पटवारी, आरआई, तहसीलदार, एसडीएम, कलेक्टर सहित मंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल तक पहुंच चुकी हैं। उनका कहना है कि आवेदन देते-देते संख्या सैकड़ा पार कर चुकी है। इस दौरान कई कलेक्टर, तहसीलदार और एसडीएम बदल गए, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
पुलिस जांच पर भी सवाल
सीलिंग जमीन के रिकॉर्ड गायब होने संबंधी शिकायत पुलिस प्रशासन तक भी पहुंच चुकी है। किसान का कहना है कि मामले में जांच की बात तो कही जा रही है, लेकिन अब तक अपराध दर्ज नहीं होने से कार्रवाई की गति पर सवाल उठ रहे हैं। आखिर रिकॉर्ड कैसे गायब हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
अब नए अधिकारियो से उम्मीद
लगातार आवेदन और अधिकारियों के बदलने के बावजूद मामले का निराकरण नहीं होने से अब किसान की नजर वर्तमान प्रशासन पर टिकी है। सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस पुराने मामले की गंभीरता से समीक्षा कर समयबद्ध तरीके से निराकरण करेगा? वहीं, पुलिस प्रशासन से भी अपेक्षा है कि रिकॉर्ड गायब होने संबंधी शिकायत की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।
फिलहाल किसान छक्कनदास मनहरे को अपनी गुहार के निराकरण का इंतजार है। अब देखना होगा कि समाचार प्रकाशन के बाद प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। मामले से जुड़े सभी पक्षों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी आगामी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।