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झीरम घाटी नरसंहार : NIA के फैसले का स्वागत, लेकिन मुख्य साजिशकर्ताओं का सामने आना बाकी — सुमित्रा धृतलहरें

06 Sep 2026

झीरम घाटी नरसंहार : NIA के फैसले का स्वागत, लेकिन मुख्य साजिशकर्ताओं का सामने आना बाकी — सुमित्रा धृतलहरें

बलौदाबाजार l झीरम घाटी नक्सली हमले के संबंध में NIA के फैसले के बाद जिला कांग्रेस कमेटी बलौदाबाजार-भाटापारा द्वारा जिला कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता आयोजित कर NIA के फैसले का स्वागत किया है। पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए  जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सुश्री सुमित्रा धृतलहरे सहित प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता सुरेंद्र शर्मा जो स्वयं झीरम घाटी हमले में घायल हुए थे विशेष रूप से उपस्थित रहे। कांग्रेस नेताओं ने पत्रकारो को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस NIA के फैसले के बाद झीरम घाटी नरसंहार के पीछे के मुख्य सूत्रधार और साजिशकर्ताओं का खुलासा होना अभी बाकी है।

श्री शर्मा ने कहा कि यह गंभीर जांच का विषय है कि घटना के मुख्य आरोपियों को न्यायालय के समक्ष किसके कहने पर पेश नहीं किया गया। कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा में समुचित सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं थी? घटना के दिन नेताओं की सुरक्षा में तैनात सुरक्षा बलों को किसके निर्देश पर हटाया गया और उन्हें अन्यत्र कहाँ भेजा गया—इन सभी सवालों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि “अदालत ने हथियारों को सजा दी है, लेकिन उन हथियारों को चलाने वाले हाथों तक जांच अभी नहीं पहुंची है।” झीरम घाटी हत्याकांड की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए घटना की व्यापक और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया संचार विभाग के पूर्व प्रभारी  शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा कि झीरम घाटी की घटना सामान्य नक्सली हमला नहीं, बल्कि सुनियोजित सुपारी किलिंग जैसी प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि हमलावरों द्वारा महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल, दिनेश पटेल सहित अन्य नेताओं के नाम लेकर उन्हें निशाना बनाया गया। ऐसे में यह पता लगना आवश्यक है कि इन नेताओं को विशेष रूप से निशाना बनाने के पीछे कौन था और किसने सुपारी दी थी। श्री त्रिवेदी ने कहा कि विभिन्न राज्यों की जेलों में ऐसे नक्सली बंद हैं, जिन्होंने कथित रूप से झीरम घाटी हमले में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। इसके बावजूद उनसे पर्याप्त पूछताछ और बयान दर्ज क्यों नहीं किए गए, यह गंभीर सवाल है। उन्होंने कहा कि झीरम की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए घटना में शामिल नक्सली नेतृत्व और अन्य संदिग्ध कड़ियों की गहन जांच जरूरी है।

जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुश्री सुमित्रा धृतलहरे ने कहा कि कांग्रेस NIA के फैसले का सम्मान करती है, लेकिन यह पूर्ण न्याय नहीं है। उन्होंने कहा कि न्याय तभी पूर्ण माना जाएगा, जब झीरम घाटी नरसंहार के पीछे के मुख्य साजिशकर्ताओं और पूरी साजिश का चेहरा जनता के सामने आएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में झीरम घाटी मामले की जांच को प्रभावित करने और भटकाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल सरकार के समय इस मामले में SIT का गठन किया गया था, लेकिन भाजपा सरकार ने जांच को आगे बढ़ने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास किया। उन्होंने यह भी कहा कि तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक द्वारा न्यायिक जांच आयोग के खिलाफ स्थगन (स्टे) लिया जाना भी अनेक सवाल खड़े करता है।

अध्यक्ष धृतलहरे ने यह भी कहा कि NIA की जांच और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर भी कांग्रेस ने समय-समय पर सवाल उठाए हैं। घटना में शामिल बताए जाने वाले बड़े नक्सली नेताओं से पूछताछ और उनके बयानों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जब तक झीरम घाटी नरसंहार के पीछे की पूरी साजिश और उसके सूत्रधार सामने नहीं आते, तब तक इस मामले को पूर्ण न्याय नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की स्पष्ट मांग है कि झीरम घाटी नरसंहार की पूरी साजिश का पर्दाफाश हो, घटना के पीछे के राजनीतिक एवं अन्य षड्यंत्रकारियों की पहचान हो तथा दोषियों को कानून के अनुसार कठोर सजा मिले।

पत्रकार वार्ता के दौरान पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष  दिनेश यदु, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष परमेश्वर यदु, जिला महामंत्री लखेश साहू, मंडल अध्यक्ष सुरेंद्र जायसवाल, ब्लॉक अध्यक्ष द्वय  प्रवीण सेन (शहर) एवं  दीपक साहू (ग्रामीण), वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री श्रीमती कालिंदी वर्मा, शहर ब्लॉक प्रभारी महामंत्री नीरज बांधे, वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व ब्लॉक शहर अध्यक्ष संदीप पांडे, सुखदेव साहू, जय सिंह ठाकुर सहित कांग्रेसजन उपस्थित रहे।