बलौदाबाजार । महिला सशक्तिकरण, नारी सम्मान और महिला कर्मचारियों की कार्यस्थल पर सुरक्षा को लेकर सरकार और प्रशासन लगातार संवेदनशीलता की बात करता है। लेकिन बलौदाबाजार के पंडित चक्रपाणि शुक्ल शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का हालिया घटनाक्रम इन दावों के सामने कई सवाल खड़े कर रहा है। स्कूल में विवाद के बाद शिक्षा विभाग ने प्रभारी प्राचार्या वंदनी श्रीवास्तव को पद से हटा दिया, वहीं इसी घटनाक्रम के बीच प्राचार्या ने सिटी कोतवाली में हिस्ट्रीशीटर आशीष शुक्ला समेत चार लोगों के खिलाफ गंभीर शिकायत देकर अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई है।
17 सितंबर को स्कूल में विवाद के दौरान प्राचार्या के कार्यालय में बाहरी लोगों के प्रवेश, वीडियो बनाने और नारेबाजी को लेकर विवाद हुआ। इसके बाद प्राचार्या ने पुलिस को दिए आवेदन में आशीष शुक्ला सहित कुल 4 व्यक्तियों पर बिना अनुमति कार्यालय में प्रवेश करने, वीडियो बनाने, अभद्रता करने, मानसिक प्रताड़ना तथा शासकीय कार्य में बाधा डालने के आरोप लगाए हैं।
प्राचार्या का कहना है कि कार्यालय में नाबालिग छात्र-छात्राएं मौजूद थे और उनकी निजता व सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने वीडियो बनाने से मना किया था। शिकायत में यह भी आरोप है कि पूर्व में भी स्कूल परिसर में बिना अनुमति फोटो-वीडियो बनाने और सोशल मीडिया पर सामग्री प्रसारित करने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या पूरे घटनाक्रम की सभी परिस्थितियों और महिला प्राचार्या की शिकायत को समान रूप से जांचे बिना उन्हें पद से हटाना उचित प्रशासनिक समाधान माना जा सकता है?
प्राचार्या की शिकायत में आशीष शुक्ला के खिलाफ पूर्व में हुई पुलिस कार्रवाई का भी उल्लेख है। आवेदन के अनुसार सिटी कोतवाली पुलिस ने 7 नवंबर 2025 को जिला प्रशासन को इस्तगासा भेजकर उसके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की थी। पुलिस रिकॉर्ड के हवाले से शिकायत में उसे आदतन अपराधी प्रवृत्ति का बताते हुए 6 नवंबर 2025 तक चार अपराध दर्ज होने की बात कही गई है। 19 अगस्त 2026 को भी उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए इस्तगासा भेजे जाने का उल्लेख है।
ऐसे में सवाल यह भी है कि एक महिला शासकीय अधिकारी यदि किसी ऐसे व्यक्ति के खिलाफ सुरक्षा और कानूनी कार्रवाई की मांग करती है, जिसे पुलिस पूर्व में आदतन अपराधी बता चुकी है, तो उसकी सुरक्षा और शिकायत पर प्रशासन की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए?
शिक्षा विभाग ने विवाद के बाद प्रभारी प्राचार्या को हटाकर वरिष्ठ व्याख्याता निर्मला साहू को विद्यालय का अस्थायी प्रशासनिक एवं वित्तीय प्रभार सौंपा है। सूत्रों के अनुसार निर्मला साहू ने वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए प्रभारी प्राचार्या पद ग्रहण करने से मना कर दिया है।
कार्रवाई के अधिकार प्रशासन के पास हैं, लेकिन नारी सम्मान और महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ यह भी है कि किसी महिला शिक्षक या अधिकारी को उसके कार्यस्थल पर भय, दबाव, सोशल मीडिया ट्रोलिंग अथवा बाहरी हस्तक्षेप से सुरक्षा मिले। यदि महिला प्राचार्या की शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो उन पर भी निष्पक्ष जांच और कार्रवाई होना जरूरी है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन प्राचार्या की शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच किस स्तर पर करता है और क्या महिला अधिकारी को कार्यस्थल पर सुरक्षा एवं सम्मान सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाता है।