बलौदाबाजार l
साहित्य सुमन बलौदाबाजार में पावस कविगोष्ठी सम्पन्न । रमाकांत झा के निवास पर साहित्यिक संस्था साहित्य सुमन बलौदाबाजार की पावस गोष्ठी गोविंद राम वर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस अवसर पर गोविंद राम जी ने बरसात पर केंद्रित भावपूर्ण काव्यपाठ किया । नेहरू जी सिस्टम के दांत के बीच जनता दबी है जीभ की तरह और सुशील पाठक ने सभ्यता से मिलने पर संस्कृति नजर आयी का स्वर के साथ पथ किया । डॉ टेकराम ने प्रेरणास्पद कविता दुनिया हे माया के बाजार ,रक्तदान करौ जी,देहदान कर तथा रामकुमार ने काट चुकी बेड़ियाँ नारी अपने पांव की का पाठ कर वातावरण को भावुक बना दिया ।चर्चित कवयित्री मंजूषा मन करुण रस का गीत ,फिर मिलूँ या न मिलूं दीदार तो कर लो,आखरी है ये मिलन अब प्यार तो कर लो सुनाकर श्रोताओं को भावुक कर दिया। रमाकांत झा ने समय और श्रम अधिक लगाकर जिसे सत्य विज्ञान बताए,उसे उच्च उच्चतर बनाकर मानव ईश्वर तक पहुंचाए तथा वीरेंद्र वर्मा ने चलती है रेलगाड़ी छुक छुक गीत का गायन किया । यू के मिश्र ने अवसरवादी जातिवादी कविता करनेवाले कवियों पर कविता के माध्यम से कटाक्ष किया ।अंत में अवकाश प्राप्त प्राचार्य श्रीमती निशा झा ने गोष्ठी को अत्यंत सार्थक बतलाते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया ।